देवरिया की अमृता तिवारी ने 35 लाख का उद्यम शुरू कर 26 महिलाओं को रोजगार दिया
देवरिया की अमृता तिवारी ने 2021 में 'ख्वाहिश क्रिएशन' की स्थापना की, जो कपड़ों की कतरनों से उत्पाद बनाकर महिलाओं को रोजगार प्रदान करती है। अब तक 30 टन कपड़ा कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला गया है।
देवरिया। जिले की अमृता तिवारी ने आत्मनिर्भरता और महिला रोजगार की दिशा में मिसाल पेश की है। उन्होंने वर्ष 2021 में ‘ख्वाहिश क्रिएशन’ की स्थापना कर कपड़ों की कतरनों और बेकार बचे कपड़ा सामग्री को उपयोगी उत्पादों में बदलने का काम शुरू किया। करीब 35 लाख रुपये के निवेश से खड़े किए गए इस उद्यम से अब 26 महिलाओं को रोजगार मिल रहा है।
अमृता तिवारी की पहल का उद्देश्य केवल कारोबार करना नहीं, बल्कि कपड़ा कचरे का बेहतर इस्तेमाल करने के साथ महिलाओं को रोजगार से जोड़ना भी है। उनके उद्यम में कपड़ों की कतरनों से विभिन्न उपयोगी उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इससे एक ओर बेकार कपड़े को दोबारा उपयोग में लाया जा रहा है, वहीं दूसरी ओर महिलाओं को अपने हुनर के जरिए आय अर्जित करने का अवसर मिल रहा है।
30 टन कपड़ा कचरे को बनाया उपयोगी
‘ख्वाहिश क्रिएशन’ के जरिए अब तक करीब 30 टन कपड़ा कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदला जा चुका है। कपड़ों की कतरनों को सीधे फेंकने के बजाय उन्हें व्यवस्थित तरीके से एकत्र कर अलग-अलग उत्पाद तैयार किए जाते हैं।
अमृता के इस प्रयास से पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिल रहा है। कपड़ा कचरे का दोबारा इस्तेमाल होने से कचरे की मात्रा कम करने में मदद मिल रही है और अनुपयोगी समझी जाने वाली सामग्री को नए उत्पादों में बदला जा रहा है।
महिलाओं को मिला रोजगार का अवसर
उद्यम से जुड़ी 26 महिलाएं विभिन्न कार्यों में योगदान दे रही हैं। इससे उन्हें घर और स्थानीय स्तर पर रोजगार का अवसर मिला है। अमृता का प्रयास है कि अधिक से अधिक महिलाओं को इस तरह के काम से जोड़ा जाए, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।
अमृता तिवारी की पहल यह भी दिखाती है कि स्थानीय स्तर पर उपलब्ध संसाधनों और हुनर का इस्तेमाल कर रोजगार के नए अवसर पैदा किए जा सकते हैं। छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका प्रयास अब एक ऐसे उद्यम का रूप ले चुका है, जिसमें पर्यावरण संरक्षण, महिला सशक्तीकरण और स्वरोजगार तीनों पहलू जुड़े हुए हैं।
स्वरोजगार की दिशा में बनी प्रेरणा
‘ख्वाहिश क्रिएशन’ के माध्यम से अमृता तिवारी ने यह संदेश दिया है कि नए विचार और मेहनत के साथ स्थानीय स्तर पर भी सफल उद्यम खड़ा किया जा सकता है। कपड़े के कचरे को उपयोगी उत्पादों में बदलने और महिलाओं को रोजगार देने की उनकी पहल देवरिया में महिला उद्यमिता और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक प्रेरणादायक उदाहरण बन रही है।
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