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मधुबन में 113 साल पुरानी रामलीला की परंपरा, मुस्लिम कलाकार बलाती मियां ने रखी थी नींव

मधुबन के दरगाह गांव में 11 अक्टूबर से 12 दिनों तक रामलीला का आयोजन होगा, जिसकी नींव मुस्लिम रंगमंच कलाकार बलाती मियां ने 1913 में रखी थी।

R Raghvendraसत्यापित पत्रकार 2 मिनट में पढ़ें
मधुबन में 113 साल पुरानी रामलीला की परंपरा, मुस्लिम कलाकार बलाती मियां ने रखी थी नींव

मधुबन (मऊ)। जिले के मधुबन क्षेत्र के दरगाह गांव में सांप्रदायिक सौहार्द और आपसी भाईचारे की मिसाल पेश करने वाली रामलीला की ऐतिहासिक परंपरा आज भी कायम है। इस वर्ष 11 अक्टूबर से गांव में 12 दिवसीय रामलीला का आयोजन किया जाएगा। इस परंपरा की नींव वर्ष 1913 में मुस्लिम रंगमंच कलाकार बलाती मियां ने रखी थी। एक सदी से अधिक समय से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा बनी हुई है।

दरगाह गांव की रामलीला की खासियत यह है कि इसकी शुरुआत एक मुस्लिम कलाकार ने की थी। बलाती मियां ने वर्ष 1913 में रामलीला की परंपरा शुरू कर धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक एकता का संदेश दिया। उनके इस प्रयास ने गांव में ऐसी परंपरा की नींव रखी, जो पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ती रही।

12 दिनों तक होगा रामलीला का मंचन

इस वर्ष रामलीला का आयोजन 11 अक्टूबर से शुरू होकर लगातार 12 दिनों तक चलेगा। इस दौरान भगवान श्रीराम के जीवन, उनके आदर्शों, वनवास, रावण के साथ युद्ध और बुराई पर अच्छाई की विजय से जुड़े प्रसंगों का मंचन किया जाएगा। आयोजन को लेकर ग्रामीणों और रामलीला से जुड़े लोगों में उत्साह है।

रामलीला भारतीय लोकनाट्य परंपरा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसके माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों, मर्यादा, त्याग, सत्य और धर्म के संदेश को जन-जन तक पहुंचाया जाता है। दरगाह गांव में आयोजित होने वाली यह रामलीला धार्मिक आयोजन के साथ-साथ लोक संस्कृति को संरक्षित करने का माध्यम भी है।

सांप्रदायिक सौहार्द की मिसाल है परंपरा

बलाती मियां द्वारा शुरू की गई रामलीला की परंपरा सामाजिक सद्भाव का संदेश देती है। यह बताती है कि कला, संस्कृति और लोक परंपराएं धार्मिक सीमाओं से परे लोगों को जोड़ने का काम करती हैं। दरगाह गांव की यह ऐतिहासिक रामलीला आज भी आपसी भाईचारे और साझा सांस्कृतिक विरासत की याद दिलाती है।

113 वर्षों से चली आ रही यह परंपरा क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान बनी हुई है। 11 अक्टूबर से शुरू होने वाले आयोजन के जरिए एक बार फिर ग्रामीण रामलीला के मंचन के माध्यम से भगवान श्रीराम के आदर्शों से रूबरू होंगे।

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