मऊ में 834 निर्माण परियोजनाओं में से 437 लंबित, डीएम ने जताई नाराजगी
मऊ में 834 निर्माण परियोजनाओं में से 397 पूरी हो चुकी हैं, जबकि 437 अब भी लंबित हैं। जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए कार्यदायी संस्थाओं को समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण काम पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
मऊ: जिले में सरकारी निर्माण परियोजनाओं को पूरा करने की धीमी रफ्तार पर जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने नाराजगी जताई है। जिले में कुल 834 निर्माण परियोजनाओं में से अब तक केवल 397 परियोजनाएं ही पूरी हो सकी हैं, जबकि 437 परियोजनाएं अभी भी लंबित हैं। इस स्थिति को गंभीरता से लेते हुए डीएम ने संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से निर्माण कार्य पूरा करने के निर्देश दिए हैं।
जिलाधिकारी ने स्पष्ट किया कि सरकारी योजनाओं के तहत कराए जा रहे निर्माण कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को निर्धारित समयसीमा के भीतर सभी परियोजनाओं को पूरा कराने के साथ निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा।
834 परियोजनाओं में आधे से अधिक काम लंबित
जिले में विभिन्न विभागों और कार्यदायी संस्थाओं के माध्यम से कुल 834 निर्माण परियोजनाओं पर काम कराया जा रहा है। इनमें से 397 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं। वहीं, 437 परियोजनाओं का निर्माण अभी अधूरा है।
आंकड़ों के अनुसार, कुल परियोजनाओं में लगभग 47.5 प्रतिशत काम ही पूरा हो पाया है, जबकि करीब 52.5 प्रतिशत परियोजनाएं लंबित हैं। इतनी बड़ी संख्या में निर्माण कार्य अधूरे रहने से विकास योजनाओं की प्रगति पर सवाल खड़े हो रहे हैं।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से जिले में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने, सरकारी भवनों के निर्माण और विभिन्न विभागों से जुड़ी विकास योजनाओं को गति मिलने की उम्मीद है।
कार्यदायी संस्थाओं की जिम्मेदारी तय करने के निर्देश
समीक्षा के दौरान जिलाधिकारी आनंद वर्द्धन ने निर्माण कार्यों में देरी को लेकर संबंधित कार्यदायी संस्थाओं के अधिकारियों से जवाबदेही सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने निर्देश दिया कि जिन परियोजनाओं में काम धीमी गति से चल रहा है, उनकी अलग से समीक्षा की जाए।
डीएम ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि प्रत्येक निर्माण परियोजना की वर्तमान स्थिति का आकलन कर उसे पूरा करने के लिए स्पष्ट कार्ययोजना तैयार की जाए। जिन परियोजनाओं में किसी प्रकार की तकनीकी या प्रशासनिक बाधा आ रही है, उसे संबंधित विभागों के समन्वय से तत्काल दूर किया जाए।
गुणवत्ता से समझौता नहीं करने की हिदायत
जिलाधिकारी ने कहा कि निर्माण कार्यों को केवल कागजों पर पूरा दिखाना पर्याप्त नहीं है। सभी परियोजनाओं में निर्धारित मानकों के अनुसार गुणवत्तापूर्ण निर्माण होना चाहिए। निर्माण सामग्री और कार्य की गुणवत्ता की नियमित जांच कराई जाए, ताकि भविष्य में किसी प्रकार की समस्या सामने न आए।
उन्होंने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया कि निर्माण कार्यों की प्रगति की लगातार निगरानी की जाए। जिन परियोजनाओं में अनावश्यक देरी हो रही है, वहां जिम्मेदार अधिकारियों और संबंधित संस्थाओं की जवाबदेही तय की जाए।
आम जनता को समय पर मिले विकास योजनाओं का लाभ
सरकारी निर्माण परियोजनाओं का उद्देश्य जिले में बुनियादी सुविधाओं का विस्तार करना और आम लोगों को बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। ऐसे में परियोजनाओं के लंबे समय तक अधूरे रहने से जनता को उनका लाभ मिलने में देरी होती है।
डीएम की सख्ती के बाद अब संबंधित कार्यदायी संस्थाओं पर लंबित निर्माण कार्यों को जल्द पूरा करने का दबाव बढ़ गया है। प्रशासन की प्राथमिकता है कि अधूरी परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा कराया जाए और सरकारी धन का उपयोग निर्धारित उद्देश्य के अनुरूप हो।
अब निगाहें निर्माण कार्यों की अगली समीक्षा पर टिकी हैं। देखना होगा कि जिलाधिकारी के निर्देशों के बाद मऊ जिले में लंबित 437 परियोजनाओं को पूरा करने की दिशा में कितनी तेजी आती है और आम जनता को इन विकास कार्यों का लाभ कब तक मिल पाता है।
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