AIMIM: कानपुर से लेकर पूर्वांचल तक बढ़ रही ओवैसी की सक्रियता, 2 अक्टूबर को खुलेगा गठबंधन का पत्ता
बाकी हैं, लेकिन ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने अपनी चुनावी तैयारियों को तेज कर दिया है
20 सितंबर को कानपुर में आयोजित जनसभा के बाद ओवैसी ने विपक्षी दलों के सामने खुलकर गठबंधन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि जो दल BJP को उत्तर प्रदेश में दोबारा सरकार बनाने से रोकना चाहते हैं, वे AIMIM के साथ बातचीत करें। इसके साथ ही उन्होंने स्पष्ट कर दिया कि यह बातचीत अनिश्चितकाल तक नहीं चलेगी। उनके मुताबिक 2 अक्टूबर तक इंतजार किया जाएगा और उसी दिन गठबंधन की घोषणा की जाएगी।
इससे AIMIM की रणनीति के दो संभावित रास्ते दिखाई देते हैं, एक तरफ पार्टी गठबंधन का रास्ता खुला रख रही है, वहीं दूसरी तरफ अपने संगठन और उम्मीदवारों की तैयारी भी जारी रख रही है।
कानपुर में उम्मीदवार उतारने का ऐलान
AIMIM ने यह भी संकेत दिया है कि वह केवल मुस्लिम-बहुल सीटों तक अपनी गतिविधियां सीमित नहीं रखना चाहती। कानपुर की सभा में ओवैसी ने घोषणा की कि कानपुर में AIMIM का उम्मीदवार चुनाव लड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि वह स्वयं उम्मीदवार के लिए प्रचार करने दो-तीन बार कानपुर आएंगे और क्षेत्र में घर-घर जाकर संपर्क करने की बात कही। यह घोषणा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे AIMIM की रणनीति में शहरी विधानसभा क्षेत्रों और पश्चिमी/मध्य उत्तर प्रदेश के विस्तार की कोशिश दिखाई देती है।
मटेरा से पहले ही उम्मीदवार की घोषणा
AIMIM ने जून में बहराइच की मटेरा विधानसभा सीट से शौकत अली को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। ओवैसी ने बहराइच की सभा को 2027 के चुनाव के लिए पार्टी के बड़े अभियान की शुरुआत के तौर पर इस्तेमाल किया। मटेरा की घोषणा के साथ ओवैसी ने यह संदेश देने की कोशिश की कि AIMIM केवल चुनाव के समय उम्मीदवार घोषित करने के बजाय पहले से विधानसभा क्षेत्रों में राजनीतिक आधार तैयार करना चाहती है।
अब नजर पूर्वांचल पर
AIMIM की आगामी गतिविधियों में पूर्वांचल भी महत्वपूर्ण क्षेत्र बनता दिखाई दे रहा है। ओवैसी की प्रस्तावित यात्राओं में आजमगढ़ जैसे इलाके शामिल हैं, जबकि पार्टी पश्चिमी यूपी में भी लगातार कार्यक्रम कर रही है। इसका मतलब यह है कि AIMIM की गतिविधियां केवल एक क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। पार्टी पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वांचल और कानपुर जैसे शहरी इलाकों में अलग-अलग सामाजिक और राजनीतिक समीकरणों को समझने तथा संगठन बनाने की कोशिश कर रही है।
करीब 200 सीटों पर संगठन विस्तार की तैयारी
AIMIM की चुनावी रणनीति का एक बड़ा हिस्सा संगठन विस्तार है। पार्टी की ओर से लगभग 200 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन मजबूत करने की तैयारी की खबरें सामने आई हैं। हालांकि इसका अर्थ यह नहीं है कि AIMIM इन सभी सीटों पर निश्चित रूप से उम्मीदवार उतारेगी।
ओवैसी ने हालिया बयानों में यह भी संकेत दिया है कि पार्टी चुनाव के लिए तैयार है और उसका लक्ष्य विधानसभा में अपनी राजनीतिक मौजूदगी बढ़ाना है।
SP-कांग्रेस पर भी नजर
AIMIM के लिए सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक सवाल यह रहेगा कि SP-कांग्रेस के साथ उसकी बातचीत किस दिशा में जाती है। ओवैसी ने विपक्षी एकता की बात करते हुए AIMIM को संभावित गठबंधन में शामिल करने की मांग रखी है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी की ओर से अखिलेश यादव ने इस पर कहा कि SP का कांग्रेस के साथ पहले से गठबंधन है। कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने भी कहा कि केवल मुस्लिम वोट BJP को हराने के लिए पर्याप्त नहीं हैं और आगे का निर्णय पार्टी नेतृत्व करेगा। इसलिए 2 अक्टूबर की घोषणा केवल AIMIM के लिए नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के विपक्षी राजनीतिक समीकरणों के लिए भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
AIMIM का संदेश: सिर्फ वोट नहीं, राजनीतिक प्रतिनिधित्व
ओवैसी के हालिया भाषणों में एक लगातार दिखाई देने वाला मुद्दा मुस्लिम राजनीतिक प्रतिनिधित्व है। बहराइच और कानपुर की सभाओं में उन्होंने मुस्लिम समुदाय को अपनी राजनीतिक नेतृत्व क्षमता विकसित करने और विधानसभा में अधिक प्रतिनिधित्व की बात कही। उन्होंने यह भी कहा कि AIMIM को केवल चुनाव में वोट लेने वाली पार्टी के बजाय राजनीतिक हिस्सेदारी की मांग करने वाली पार्टी के रूप में देखा जाना चाहिए।
आगे क्या होगा?
AIMIM की घोषित गतिविधियों के आधार पर अगले चरण में चार चीजों पर सबसे ज्यादा नजर रहेगी:
पहला- 2 अक्टूबर। पार्टी किसके साथ गठबंधन करती है या अकेले चुनाव लड़ने का रास्ता चुनती है।
दूसरा - उम्मीदवारों की अगली सूची। मटेरा और कानपुर के बाद किन विधानसभा क्षेत्रों के नाम सामने आते हैं।
तीसरा - ओवैसी का यूपी दौरा। किन जिलों में लगातार सभाएं होती हैं और किन सीटों को पार्टी प्राथमिकता देती है।
चौथा - संगठन का विस्तार। लगभग 200 विधानसभा क्षेत्रों में संगठन खड़ा करने की योजना वास्तव में कितनी सीटों पर चुनावी तैयारी में बदलती है।
अभी तक की गतिविधियों से इतना स्पष्ट है कि AIMIM ने 2027 के यूपी चुनाव को काफी पहले से अपनी राजनीतिक रणनीति का केंद्र बना लिया है। लेकिन पार्टी कितनी सीटों पर अंतिम रूप से उम्मीदवार उतारेगी और उसका चुनावी गठबंधन क्या होगा, इसका सबसे स्पष्ट संकेत 2 अक्टूबर के बाद ही मिलेगा।
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