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बलिया: जीरो पॉवर्टी सूची में शामिल विधवा को नहीं मिला नया आवास, जर्जर मकान में दो बेटियों के साथ रहने को मजबूर

सियर ब्लॉक के रामपुर गांव का मामला, मुख्यमंत्री आवास योजना का लाभ पाने के लिए महीनों से लगा रही चक्कर; जिलाधिकारी से लगाई मदद की गुहार।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 3 मिनट में पढ़ें
बलिया: जीरो पॉवर्टी सूची में शामिल विधवा को नहीं मिला नया आवास, जर्जर मकान में दो बेटियों के साथ रहने को मजबूर

बलिया। जिले के सियर ब्लॉक अंतर्गत भीमपुरा थाना के रामपुर गांव में एक विधवा महिला की आवास संबंधी समस्या सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन पर सवाल खड़े कर रही है। पति स्व. नंदलाल यादव की मृत्यु के बाद महिला अपनी दो मासूम बेटियों के साथ बेहद कठिन परिस्थितियों में जीवन गुजार रही है। परिवार को जीरो पॉवर्टी अभियान के सर्वे में अति गरीब श्रेणी में चिह्नित किए जाने के बावजूद महिला को अब तक सुरक्षित आवास मिलने का इंतजार है।

सोशल मीडिया पर उठाया गया मामला: इस मामले से संबंधित पोस्ट सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर भी साझा की गई है।

मिली जानकारी के अनुसार, महिला को वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत आवास मिला था। हालांकि, कच्ची ईंटों और टिन शेड से बना यह मकान अब जर्जर स्थिति में पहुंच गया है। मकान की दीवारों में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं और उसके कभी भी गिरने की आशंका बनी हुई है। ऐसे में महिला अपनी दोनों बच्चियों के साथ इसी मकान में रहने को मजबूर है। परिवार को हर समय हादसे का डर सताता रहता है।

महिला का कहना है कि जीरो पॉवर्टी अभियान के तहत हुए सर्वे में उसके परिवार को अति गरीब के रूप में चिह्नित किया गया है। इसके बावजूद उसे नए आवास का लाभ नहीं मिल सका है। वह मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास पाने की उम्मीद में कई महीनों से ब्लॉक कार्यालय के चक्कर लगा रही है। आरोप है कि बार-बार गुहार लगाने के बाद भी उसकी समस्या का समाधान नहीं हुआ है।

सरकारी आवास योजनाओं के लाभ पर उठे सवाल

केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण का उद्देश्य पात्र ग्रामीण परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराना है। वहीं, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत निर्धारित पात्रता के अनुसार ऐसे जरूरतमंद परिवारों को आवास सहायता दी जाती है, जो विभिन्न कारणों से अन्य आवास योजनाओं के लाभ से वंचित रह जाते हैं। हालांकि, किसी परिवार का जीरो पॉवर्टी सर्वे में चयनित होना अपने आप आवास स्वीकृत होने की गारंटी नहीं है। इसके लिए संबंधित योजना के नियमों, पात्रता और सत्यापन की प्रक्रिया पूरी होना आवश्यक है।

पीड़ित महिला ने जिलाधिकारी बलिया से मामले की जांच कराने, जर्जर मकान की स्थिति का स्थलीय निरीक्षण कराने और नियमानुसार मुख्यमंत्री आवास योजना के तहत आवास उपलब्ध कराने की मांग की है। अब देखना है कि प्रशासन इस बेसहारा परिवार की समस्या पर कब ध्यान देता है और उसे सुरक्षित छत उपलब्ध कराने के लिए क्या कदम उठाता है।

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