चुनाव आयोग के खिलाफ पूर्वांचल में क्या माहौल है?
बलिया से वाराणसी, गोरखपुर से गाजीपुर और मऊ से देवरिया तक चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर विपक्षी दलों का विरोध तेज हो गया है। SIR और मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों के सवाल ने 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल की सियासत को नया मुद्दा दे दिया है।
पूर्वांचल की राजनीति में इन दिनों सड़क पर एक नया नारा तेजी से सुनाई दे रहा है- ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’। मुद्दा है मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण यानी SIR को लेकर विपक्ष की आपत्तियां।
दिल्ली में INDIA ब्लॉक के नेताओं के प्रदर्शन के साथ शुरू हुआ यह राजनीतिक अभियान अब पूर्वांचल के जिलों तक पहुंच चुका है। बलिया में 8 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के कार्यकर्ताओं ने जिला मुख्यालय तक मार्च निकालकर CEC के इस्तीफे की मांग की। वाराणसी में समाजवादी पार्टी के प्रदर्शन के साथ यह मुद्दा सड़क पर दिखा, जबकि मऊ में विरोध प्रदर्शन के दौरान पुतला दहन को लेकर पुलिस से टकराव और FIR तक की स्थिति बन गई।
बलिया बना ‘ग्राउंड जीरो’
पूर्वांचल में अगर किसी जिले में यह विरोध सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है तो वह बलिया है।
8 अक्टूबर को INDIA गठबंधन के बैनर तले SP कार्यालय से जुलूस निकाला गया और कार्यकर्ता कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शनकारियों ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ और ‘ज्ञानेश कुमार इस्तीफा दो’ जैसे नारे लगाए। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भी सौंपा गया। प्रदर्शन में विधायक जयप्रकाश अंचल सहित गठबंधन के कई नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
बलिया में यह विरोध अचानक सामने आया घटनाक्रम नहीं है। पिछले दिनों से ही SP और कांग्रेस के स्थानीय संगठन SIR और मतदाता सूची से जुड़े सवालों को लेकर आंदोलन की तैयारी कर रहे थे। 8 अक्टूबर का प्रदर्शन उसी अभियान का सबसे बड़ा सार्वजनिक रूप दिखाई दिया।
वाराणसी में वकीलों से लेकर SP तक मोर्चा
बनारस बार एसोसिएशन से जुड़े अधिवक्ताओं ने चुनाव प्रक्रिया और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध जताया। वहीं कांग्रेस पहले ही CEC के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए 2024 के वाराणसी लोकसभा चुनाव को लेकर भी सवाल उठा चुकी है। कांग्रेस ने चुनाव परिणाम को रद्द करने और स्वतंत्र जांच की मांग तक की है।
5 अक्टूबर को वाराणसी में SP ने भी CEC के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। वहीं 8 अक्टूबर को SP कार्यकर्ताओं ने शास्त्री घाट से जिला मुख्यालय तक मार्च निकालकर चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूची के सवाल उठाए। प्रदर्शन के दौरान प्रतीकात्मक पुतला दहन और ‘वोट चोरी’ के आरोपों वाले नारे भी सामने आए।
वाराणसी इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यहां चुनावी नैरेटिव सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे अजय राय के बीच 2024 के मुकाबले से जुड़ जाता है। कांग्रेस पहले से आरोप लगाती रही है कि वाराणसी चुनाव में वोटों को लेकर अनियमितता हुई।
मऊ में विरोध से FIR तक पहुंचा मामला
SP, कांग्रेस और CPI(M) से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ‘वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च निकाला। प्रदर्शन के दौरान CEC का पुतला जलाने की कोशिश हुई। पुलिस के मुताबिक इस दौरान पुतले को लेकर खींचतान हुई और पांच पुलिसकर्मी झुलस गए।
इसके बाद पुलिस ने SP नेताओं समेत आठ लोगों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किया और 400 अज्ञात लोगों को भी मामले में शामिल किया। एक अन्य रिपोर्ट में 200 से अधिक अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR की बात सामने आई है। मऊ में इससे पहले भी CEC के खिलाफ प्रदर्शन हो चुका है। सितंबर के अंत में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदर्शन के दौरान सड़क जाम किया था और कई कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिया गया था।
गाजीपुर में SP और अधिवक्ताओं का दबाव
गाजीपुर में समाजवादी पार्टी ने CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन करते हुए पार्टी कार्यालय से जिला मुख्यालय तक मार्च निकाला। कार्यकर्ताओं ने CEC का पुतला भी फूंका और चुनाव प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाए। गाजीपुर में अधिवक्ताओं की ओर से भी चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं को लेकर विरोध सामने आया है।
यहां खास बात यह है कि SP का राजनीतिक आंदोलन और गैर-दलीय पेशेवर समूहों की नाराजगी, दोनों एक ही मुद्दे के आसपास दिखाई दे रहे हैं।
देवरिया में वाम दल और SP दोनों सक्रिय
देवरिया में सितंबर के अंत में संयुक्त वामपंथी दल ने कलेक्ट्रेट परिसर में प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने CEC के कार्यकाल में हुए चुनावों की निष्पक्षता पर सवाल उठाते हुए कथित अनियमितताओं की जांच की मांग की और राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन भेजने की मांग रखी। इसके बाद 4 अक्टूबर को SP ने ‘लोकतंत्र बचाओ, वोट बचाओ, देश बचाओ’ मार्च निकाला। मतदाता सूची के विवाद को लेकर बड़ी संख्या में कार्यकर्ता सड़क पर उतरे और प्रदर्शन के दौरान हंगामा भी हुआ।
गोरखपुर में कांग्रेस का पुतला दहन, BJP का पलटवार
गोरखपुर में 28 सितंबर को कांग्रेस के जिला और महानगर संगठनों ने SIR में कथित अनियमितताओं के खिलाफ प्रदर्शन किया। बिस्मिल पार्क से जिलाधिकारी कार्यालय तक मार्च निकाला गया और CEC का पुतला जलाने की कोशिश हुई। इस दौरान पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच खींचतान भी हुई।
लेकिन गोरखपुर की तस्वीर एकतरफा नहीं है। 8 अक्टूबर को BJP सांसद रवि किशन ने विपक्ष के EVM और चुनावी प्रक्रिया पर सवाल उठाने को लेकर पलटवार किया। उन्होंने कहा कि विपक्ष चुनाव हारने के बाद EVM और चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाता है और जीतने पर वही व्यवस्था सही लगती है।
2027 से पहले पूर्वांचल में क्यों महत्वपूर्ण है यह मुद्दा?
पूर्वांचल उत्तर प्रदेश की चुनावी राजनीति का सबसे महत्वपूर्ण भूगोल है। बलिया, गाजीपुर, मऊ, वाराणसी, देवरिया और गोरखपुर जैसे जिले अलग-अलग राजनीतिक समीकरणों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
ऐसे में अगर मतदाता सूची और SIR को लेकर विरोध लगातार बढ़ता है तो इसका असर केवल मौजूदा प्रदर्शन तक सीमित नहीं रहेगा। विपक्ष इसे गांव-गांव तक ले जाने की कोशिश करेगा।
कांग्रेस ने इसी दिशा में ‘Vote Bachao, Desh Bachao’ अभियान को आगे बढ़ाने की घोषणा की है। पार्टी के घोषित कार्यक्रम में जिला स्तर के आंदोलनों के बाद ब्लॉक स्तर पर बैठकें और फिर गांवों में चौपालों के जरिए अभियान चलाने की योजना बताई गई है।
अगर आने वाले हफ्तों में यह मुद्दा गांवों तक पहुंचता है, स्थानीय स्तर पर मतदाता सूची की जांच अभियान बनता है और SP-कांग्रेस समेत दूसरे विपक्षी दल इसे संयुक्त रूप से उठाते हैं, तो 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल की राजनीति में ‘विकास’ और ‘जातीय समीकरण’ के साथ ‘वोट की सुरक्षा’ भी एक बड़ा चुनावी मुद्दा बन सकता है।
कोई भी पंक्ति चुनकर उसे उद्धरण के रूप में भी शेयर कर सकते हैं।
संबंधित खबरें
चुनाव
NewsDesk
पल्लवी पटेल मऊ के गोफा मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगी
अपना दल कमेरावादी की नेता और विधायक पल्लवी पटेल बुधवार को मऊ के गोफा खेल मैदान में कार्यकर्ताओं को संबोधित कर…
चुनाव
NewsDesk
दिलदारनगर में भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ सिंह की जीत का भरोसा जताया गया
दिलदारनगर (गाजीपुर) में नगर पंचायत अध्यक्ष अविनाश जायसवाल ने स्नातक एमएलसी चुनाव में भाजपा प्रत्याशी केदारनाथ…
चुनाव
NewsDesk
बलिया में सपा ने एमएलसी चुनाव में भाजपा पर दबाव बनाने का आरोप लगाया
समाजवादी पार्टी ने बलिया में एमएलसी चुनाव को लेकर भाजपा पर सरकारी मशीनरी के दुरुपयोग का आरोप लगाया है। सपा ने…
चुनाव
NewsDesk
आजमगढ़ में निर्वाचन अधिकारी की बैठक, मतदान प्रक्रिया में नियमों का पालन अनिवार्य
आजमगढ़ जिले में निर्वाचन अधिकारी ने मतदान प्रक्रिया को स्वतंत्र और निष्पक्ष ढंग से सम्पन्न कराने के लिए मतदान…