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योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग से प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पूछे 7 सवाल

राजनीतिक और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने गुरुवार को दिल्ली के एक प्रेस क्लब में चुनाव आयोग के हलफ़नामे को लेकर सात सवाल रखे।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 2 मिनट में पढ़ें
योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग से प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पूछे 7 सवाल

राजनीतिक विश्लेषक और सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव ने गुरुवार को दिल्ली के प्रेस क्लब में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में चुनाव आयोग के हलफनामे और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर सात सवाल उठाए। उनके साथ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, सामाजिक कार्यकर्ता अंजलि भारद्वाज और नेहा बोरा भी मौजूद रहे। कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग से प्रक्रिया से जुड़े निर्णयों और दस्तावेजों पर स्पष्ट जवाब देने की मांग की।

योगेंद्र यादव ने सवाल किया कि देशव्यापी SIR प्रक्रिया शुरू करने का फैसला किसने लिया और इससे संबंधित निर्णयों का आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है। उन्होंने मतदाता पंजीकरण के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म-6 में किए गए बदलावों तथा अतिरिक्त घोषणा की अनिवार्यता को लेकर भी स्पष्टीकरण मांगा।

उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि मतदाता सूची में नाम जोड़ने और हटाने का अधिकार संबंधित निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारियों (ERO) के पास किस सीमा तक है और क्या इस प्रक्रिया में केंद्रीय स्तर पर हस्तक्षेप किया गया। यादव ने पश्चिम बंगाल में लगभग 16 लाख मतदाताओं के नाम हटाने से संबंधित अपीलों के पीछे जिम्मेदार लोगों की पहचान सार्वजनिक करने की मांग भी उठाई।

इसके अलावा, उन्होंने मतदाता सूची में तार्किक विसंगतियों की पहचान के लिए इस्तेमाल किए गए सॉफ्टवेयर और उसकी प्रक्रिया को सार्वजनिक करने की मांग की। उन्होंने पूछा कि फॉर्म-7 के माध्यम से बड़ी संख्या में नाम हटाने की आपत्तियां कैसे दाखिल की गईं और SIR प्रक्रिया पूरी होने के बाद भी मतदाता सूची में नाम जोड़ने या बदलने की प्रक्रिया किस आधार पर जारी है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कार्यकर्ताओं ने चुनाव आयोग के हलफनामे में किए गए दावों और सूचना के अधिकार (RTI) के तहत उपलब्ध कराई गई जानकारी के बीच कथित विरोधाभासों पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए निर्णयों से संबंधित रिकॉर्ड और जिम्मेदारी तय करने की व्यवस्था स्पष्ट होनी चाहिए।

यह मामला मतदाता सूची के पुनरीक्षण, नाम जोड़ने और हटाने की प्रक्रिया तथा चुनाव आयोग की जवाबदेही को लेकर चल रही बहस के बीच सामने आया है। कार्यकर्ताओं ने आयोग से उठाए गए सवालों पर सार्वजनिक रूप से स्पष्टीकरण देने की मांग की।

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