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आजमगढ़ और बलिया में चक्रवाती तूफान अर्नब से फसलों को भारी नुकसान

चक्रवाती तूफान अर्नब के कारण आजमगढ़ और बलिया में लगातार बारिश से किसानों की धान की फसलें बर्बाद हो गई हैं। आजमगढ़ में 250 एकड़ और बलिया में 2500 हेक्टेयर फसल गिरने की सूचना है, जिससे किसानों को आर्थिक नुकसान का सामना करना पड़ रहा है।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 6 मिनट में पढ़ें
आजमगढ़ और बलिया में चक्रवाती तूफान अर्नब से फसलों को भारी नुकसान

आजमगढ़/बलिया। पूर्वांचल में चक्रवाती तूफान अर्नब के प्रभाव से हुई बेमौसम बारिश और तेज हवाओं ने किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। धान की फसल पककर कटाई के लिए तैयार थी, लेकिन मौसम के अचानक बदलने से किसानों की महीनों की मेहनत पर पानी फिरता नजर आ रहा है। आजमगढ़ और बलिया में तेज हवाओं के साथ लगातार हुई बारिश से बड़े पैमाने पर धान की फसल खेतों में गिर गई है। शुरुआती सूचनाओं के मुताबिक, आजमगढ़ में 250 एकड़ से अधिक और बलिया में करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्रफल में धान की फसल प्रभावित हुई है। इससे किसानों को भारी आर्थिक नुकसान होने की आशंका है।

आजमगढ़ में 250 एकड़ से अधिक धान की फसल प्रभावित

आजमगढ़ जिले में चक्रवाती तूफान अर्नब का असर ग्रामीण क्षेत्रों में साफ दिखाई दे रहा है। लगातार बारिश और तेज हवाओं के कारण पककर तैयार धान की फसल खेतों में गिर गई है। जिले के लालगंज, ठेकमा, सगड़ी, अतरौलिया, पवई, अहरौला, कप्तानगंज और आसपास के क्षेत्रों में फसलों को नुकसान पहुंचने की सूचना है।

कई स्थानों पर धान की बालियां जमीन से लग गई हैं। खेतों में बारिश का पानी जमा होने के कारण फसल के सड़ने और दानों की गुणवत्ता खराब होने का खतरा बढ़ गया है। कुछ किसानों ने धान की कटाई शुरू कर दी थी, लेकिन बारिश के कारण कटी हुई फसल भी भीग गई है।

ठेकमा क्षेत्र में भी कई गांवों में धान की फसल गिरने से किसान परेशान हैं। जिन किसानों ने अच्छी पैदावार की उम्मीद में खेती पर खाद, बीज, सिंचाई और मजदूरी के रूप में पूंजी लगाई थी, उन्हें अब लागत निकालना भी मुश्किल नजर आ रहा है।

बलिया में 2500 हेक्टेयर धान की फसल जमीन पर गिरी

बलिया जिले में भी तूफान अर्नब ने खेती-किसानी को बड़ा झटका दिया है। बीते 24 घंटे के दौरान तेज हवाओं और लगातार बारिश के कारण करीब 2500 हेक्टेयर में धान की फसल खेतों में गिरने का अनुमान है।

पूर, पंदह, खेजुरी, बैरिया, बेल्थरारोड, नरहीं और गड़वार सहित कई क्षेत्रों में फसलों पर मौसम की मार पड़ी है। कई गांवों में खेतों में खड़ी धान की तैयार फसल जमीन पर बिछ गई है। इसके अलावा मक्का, बाजरा और ज्वार की फसलें भी प्रभावित हुई हैं।

किसानों के सामने सबसे बड़ी समस्या खेतों में पानी जमा होने की है। जमीन पर गिरी धान की बालियां लगातार नमी के संपर्क में रहने से खराब हो सकती हैं। इससे न केवल उत्पादन प्रभावित होगा, बल्कि बाजार में उपज की गुणवत्ता और कीमत पर भी असर पड़ने की आशंका है।

बलिया में लगातार बारिश के कारण तापमान में भी गिरावट दर्ज की गई है। मौसम में अचानक आए बदलाव से आम जनजीवन प्रभावित हुआ है और ग्रामीण इलाकों में जलभराव की समस्या भी देखने को मिली है।

धान के साथ रबी की खेती पर भी संकट

बेमौसम बारिश का असर केवल धान की फसल तक सीमित नहीं है। पूर्वांचल के किसान अब गेहूं, सरसों, मटर और चने की बुवाई की तैयारी में जुटने वाले थे। लेकिन खेतों में पानी भरने और मिट्टी में अधिक नमी होने के कारण कृषि कार्य प्रभावित हो सकता है।

जिन किसानों ने मटर जैसी दलहनी फसलों की बुवाई कर दी है, उन्हें भी फसल खराब होने की आशंका सता रही है। वहीं, धान की कटाई और मड़ाई में देरी होने से रबी फसलों की बुवाई का समय भी आगे खिसक सकता है।

इस तरह किसानों को खरीफ की तैयार फसल के नुकसान के साथ अगली फसल की तैयारी में भी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

किसानों के सामने लागत निकालने की चुनौती

किसानों का कहना है कि धान की खेती में पहले ही काफी खर्च हो चुका है। खेत की तैयारी, बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और मजदूरी पर बड़ी रकम खर्च की गई है। फसल पकने के बाद किसानों को उम्मीद थी कि धान बेचकर वे अपनी आर्थिक जरूरतें पूरी कर सकेंगे और अगली फसल की तैयारी करेंगे।

लेकिन कटाई के ठीक पहले हुई बारिश ने उनकी उम्मीदों को झटका दिया है। छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह नुकसान ज्यादा चिंताजनक है, क्योंकि उनकी आजीविका काफी हद तक खेती पर निर्भर है।

कृषि विशेषज्ञों ने जताई उत्पादन प्रभावित होने की आशंका

कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, पकने के समय धान की फसल का तेज हवा और बारिश के कारण गिरना नुकसानदायक हो सकता है। जमीन पर गिरी फसल में दानों के खराब होने, बालियों के सड़ने और गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका रहती है।

बलिया के कृषि विज्ञान केंद्र सोहांव के वैज्ञानिक डॉ. सोमेंद्र नाथ के अनुसार, धान की फसल गिरने से परिस्थितियों के आधार पर 30 से 40 प्रतिशत तक पैदावार प्रभावित हो सकती है। वहीं, आजमगढ़ के कृषि वैज्ञानिकों ने भी खेतों में जलभराव और कटी हुई फसल के भीगने से नुकसान की आशंका जताई है।

सर्वे और मुआवजे की मांग तेज

फसल बर्बाद होने से परेशान किसानों ने जिला प्रशासन और कृषि विभाग से प्रभावित क्षेत्रों का स्थलीय निरीक्षण कराने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नुकसान का सही आकलन कराकर पात्र किसानों को सरकारी नियमों के अनुसार मुआवजा दिया जाना चाहिए।

बलिया प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन कराने के लिए तहसील स्तर पर लेखपालों को जिम्मेदारी सौंपे जाने की जानकारी सामने आई है। प्रशासन के मुताबिक, निर्धारित नियमों के तहत 33 प्रतिशत से अधिक फसल नुकसान होने पर पात्र किसानों को अधिकतम 34 हजार रुपये प्रति दो हेक्टेयर की दर से सहायता देने का प्रावधान है।

हालांकि, दोनों जिलों में वास्तविक नुकसान और मुआवजे के पात्र किसानों की संख्या का अंतिम आंकड़ा सर्वेक्षण के बाद ही स्पष्ट होगा।

किसानों को अब मौसम साफ होने का इंतजार

आजमगढ़ और बलिया के किसानों के सामने इस समय सबसे बड़ी चुनौती अपनी बची हुई फसल को सुरक्षित बचाने की है। किसान चाहते हैं कि जल्द से जल्द मौसम साफ हो, ताकि खेतों में गिरी धान की फसल को समेटकर कटाई और मड़ाई का काम पूरा किया जा सके।

कुल मिलाकर, चक्रवाती तूफान अर्नब ने धान की कटाई के महत्वपूर्ण समय पर पूर्वांचल के किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। आजमगढ़ में 250 एकड़ और बलिया में 2500 हेक्टेयर से अधिक क्षेत्र में फसल प्रभावित होने की सूचना ने कृषि क्षेत्र में चिंता बढ़ा दी है। अब किसानों की निगाहें प्रशासनिक सर्वेक्षण, सरकारी सहायता और मौसम में सुधार पर टिकी हैं।

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