आजमगढ़ में 1 से 7 नवंबर तक माटीकला महोत्सव का आयोजन
आजमगढ़ में 1 से 7 नवंबर तक डॉ. अंबेडकर पार्क में माटीकला महोत्सव आयोजित होगा। इस महोत्सव में 25 निःशुल्क स्टॉल लगाए जाएंगे, जहां निजामाबाद की जीआई-टैग ब्लैक पाटरी, चुनार की टेराकोटा कला और छठ पर्व से जुड़े मिट्टी के उत्पाद प्रदर्शित होंगे।
आजमगढ़। जिले में पारंपरिक माटीकला को बढ़ावा देने और मिट्टी के उत्पादों को नई पहचान दिलाने के उद्देश्य से 1 से 7 नवंबर तक माटीकला महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। शहर के डॉ. अंबेडकर पार्क में आयोजित होने वाले इस सात दिवसीय महोत्सव में विभिन्न क्षेत्रों के कारीगर अपनी कलाकृतियों और पारंपरिक उत्पादों का प्रदर्शन करेंगे। आयोजन के दौरान कुल 25 निःशुल्क स्टॉल लगाए जाएंगे, जिन पर मिट्टी से तैयार आकर्षक और उपयोगी वस्तुएं देखने को मिलेंगी।
इस महोत्सव का प्रमुख आकर्षण निजामाबाद की प्रसिद्ध जीआई-टैग ब्लैक पाटरी होगी। इसके साथ ही चुनार की टेराकोटा कला और छठ पर्व में इस्तेमाल होने वाले मिट्टी के पारंपरिक उत्पादों को भी प्रदर्शित किया जाएगा। इन स्टॉलों के माध्यम से लोगों को पूर्वांचल की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा और स्थानीय कारीगरों की रचनात्मकता को करीब से जानने का अवसर मिलेगा।
निजामाबाद की ब्लैक पाटरी रहेगी खास आकर्षण
आजमगढ़ के निजामाबाद की ब्लैक पाटरी देशभर में अपनी विशिष्ट पहचान रखती है। काली चमकदार सतह और आकर्षक नक्काशी वाली इस पारंपरिक कला को जीआई टैग भी प्राप्त है। महोत्सव में इसके विभिन्न उत्पाद प्रदर्शित किए जाएंगे। इनमें सजावटी सामान, बर्तन और अन्य हस्तनिर्मित कलाकृतियां शामिल हो सकती हैं।
इसके अलावा चुनार की टेराकोटा कला के जरिए मिट्टी से तैयार की जाने वाली पारंपरिक मूर्तियों और सजावटी वस्तुओं की विशेषता भी सामने आएगी।
छठ पर्व से जुड़े मिट्टी के उत्पादों की भी होगी प्रदर्शनी
नवंबर की शुरुआत में छठ पर्व को देखते हुए महोत्सव में पूजा से संबंधित मिट्टी के उत्पाद भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। पारंपरिक मिट्टी के बर्तन और पर्व में उपयोग होने वाली वस्तुओं के माध्यम से स्थानीय संस्कृति और परंपराओं को प्रदर्शित किया जाएगा।
इससे लोगों को पारंपरिक मिट्टी के उत्पादों के महत्व को समझने और स्थानीय कारीगरों के काम को प्रोत्साहित करने का अवसर मिलेगा।
कारीगरों को मिलेगा बाजार और पहचान का अवसर
माटीकला महोत्सव का उद्देश्य केवल प्रदर्शनी लगाना नहीं, बल्कि पारंपरिक कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री के लिए बेहतर मंच उपलब्ध कराना भी है। 25 निःशुल्क स्टॉल मिलने से कारीगरों को बिना स्टॉल शुल्क दिए अपने हुनर और उत्पादों को लोगों तक पहुंचाने का अवसर मिलेगा।
मिट्टी के उत्पादों की मांग बढ़ने से इस पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े कुम्हारों और शिल्पकारों को आर्थिक रूप से लाभ मिलने की उम्मीद है। साथ ही नई पीढ़ी को भी माटीकला की विरासत से परिचित कराया जा सकेगा।
सात दिनों तक चलेगा आयोजन
डॉ. अंबेडकर पार्क में 1 से 7 नवंबर तक चलने वाला यह महोत्सव आजमगढ़ के लोगों के लिए पारंपरिक कला, संस्कृति और हस्तशिल्प को देखने का विशेष अवसर होगा। इसमें निजामाबाद की ब्लैक पाटरी, चुनार की टेराकोटा और छठ पर्व से जुड़े मिट्टी के उत्पादों के जरिए पूर्वांचल की कलात्मक विरासत को एक मंच पर प्रस्तुत किया जाएगा।
महोत्सव से स्थानीय हस्तशिल्प को प्रोत्साहन मिलने के साथ ही मिट्टी के उत्पादों के प्रति लोगों की रुचि बढ़ने की भी उम्मीद है।
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