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बलिया की फेफना सीट पर टिकट की जंग तेज, नारद राय ने सपा छोड़ी

बलिया की फेफना विधानसभा सीट पर 2027 चुनाव के लिए टिकट की दावेदारी में बीजेपी के नारद राय, उपेंद्र तिवारी और चंद्रशेखर परिवार शामिल हैं।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 4 मिनट में पढ़ें
बलिया की फेफना सीट पर टिकट की जंग तेज, नारद राय ने सपा छोड़ी

बलिया: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज होने लगी है। बलिया जिले की फेफना विधानसभा सीट पर भी टिकट की दावेदारी को लेकर सियासी मुकाबला दिलचस्प होता दिखाई दे रहा है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में इस सीट से चुनाव लड़ने के लिए कई नेताओं के नाम चर्चा में हैं। इनमें नारद राय, पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी और चंद्रशेखर परिवार की दावेदारी को लेकर राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं।

फेफना विधानसभा सीट जिले की महत्वपूर्ण राजनीतिक सीटों में शामिल है। यहां भाजपा और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच मुकाबला हमेशा से राजनीतिक दृष्टि से अहम माना जाता रहा है। आगामी चुनाव को देखते हुए विभिन्न दलों के नेता अभी से अपनी राजनीतिक जमीन मजबूत करने में जुटे हैं।

नारद राय की एंट्री से भाजपा में बढ़ी प्रतिस्पर्धा

नारद राय लंबे समय तक समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं। वह सपा सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रह चुके हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने भाजपा का दामन थाम लिया था। इसके बाद से ही उनकी राजनीतिक गतिविधियां बलिया में चर्चा का विषय बनी हुई हैं।

नारद राय अब फेफना विधानसभा क्षेत्र में अपनी सक्रियता बढ़ा रहे हैं। वह जनता के बीच पहुंचकर स्थानीय मुद्दों को उठा रहे हैं और समर्थकों के साथ संपर्क बनाए हुए हैं। उनके भाजपा में आने से पार्टी के भीतर टिकट की प्रतिस्पर्धा भी बढ़ गई है।

उपेंद्र तिवारी का पुराना राजनीतिक आधार

पूर्व मंत्री उपेंद्र तिवारी फेफना विधानसभा सीट से दो बार विधायक रह चुके हैं। उन्होंने 2012 और 2017 के विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज की थी। योगी आदित्यनाथ सरकार के पहले कार्यकाल में उन्हें मंत्री पद की जिम्मेदारी भी मिली थी।

2022 के विधानसभा चुनाव में उन्हें सपा के संग्राम सिंह यादव से हार का सामना करना पड़ा था। इसके बावजूद उपेंद्र तिवारी क्षेत्र में अपनी राजनीतिक सक्रियता बनाए हुए हैं। उनकी पुरानी संगठनात्मक पकड़ और चुनावी अनुभव को देखते हुए उनकी दावेदारी को भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

चंद्रशेखर परिवार की सुषमा शेखर भी चर्चा में

फेफना सीट पर तीसरा प्रमुख नाम पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर की पुत्रवधू डॉ. सुषमा शेखर का है। उनके पति नीरज शेखर भाजपा के राज्यसभा सांसद हैं। सुषमा शेखर भी क्षेत्र में राजनीतिक और सामाजिक गतिविधियों के जरिए अपनी उपस्थिति मजबूत करने में जुटी हैं।

चंद्रशेखर परिवार की राजनीतिक विरासत बलिया से जुड़ी रही है। ऐसे में सुषमा शेखर की सक्रियता को भी 2027 के चुनाव से जोड़कर देखा जा रहा है। यदि पार्टी उनके नाम पर विचार करती है तो भाजपा के सामने राजनीतिक विरासत और स्थानीय जनसंपर्क से जुड़ा एक अलग विकल्प होगा।

भाजपा नेतृत्व के सामने टिकट चयन की चुनौती

फेफना विधानसभा सीट पर भाजपा के सामने सबसे बड़ी चुनौती तीनों दावेदारों के बीच संतुलन बनाने की होगी। उपेंद्र तिवारी के पास दो बार विधायक रहने का अनुभव है, नारद राय के पास लंबा राजनीतिक अनुभव और क्षेत्रीय संपर्क है, जबकि सुषमा शेखर के साथ पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर परिवार की राजनीतिक विरासत जुड़ी है।

ऐसे में पार्टी नेतृत्व उम्मीदवार का चयन करते समय संगठन में सक्रियता, स्थानीय लोकप्रियता, चुनाव जीतने की क्षमता और सामाजिक समीकरणों को ध्यान में रख सकता है।

2027 में दिलचस्प होगा फेफना का मुकाबला

2022 के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने फेफना सीट पर जीत हासिल की थी। अब भाजपा इस सीट को दोबारा अपने कब्जे में लेने की तैयारी में जुटी है। दूसरी ओर सपा भी अपनी मौजूदा राजनीतिक स्थिति बरकरार रखने की कोशिश करेगी।

फिलहाल भाजपा की ओर से किसी भी दावेदार के नाम की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है। इसलिए टिकट को लेकर चल रही चर्चाओं को राजनीतिक संभावनाओं के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

कुल मिलाकर, फेफना विधानसभा सीट पर 2027 के चुनाव से पहले ही राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नारद राय की भाजपा में नई राजनीतिक पारी, उपेंद्र तिवारी का पुराना जनाधार और सुषमा शेखर की दावेदारी ने मुकाबले को रोचक बना दिया है। अब देखना होगा कि भाजपा नेतृत्व किस चेहरे पर भरोसा जताता है और समाजवादी पार्टी अपनी सीट बचाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है।

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