गाजीपुर में धान की फसल पर रोगों का खतरा, कृषि विभाग ने किसानों को किया सतर्क
विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी, संतुलित उर्वरक प्रयोग और उचित जल प्रबंधन पर विशेष ध्यान देने को कहा है। समय रहते बीमारी की पहचान होने पर फसल को होने वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
गाजीपुर। खरीफ सीजन में धान की फसल पर विभिन्न रोगों के प्रकोप की आशंका को देखते हुए कृषि विभाग ने किसानों को सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग ने किसानों से खेतों की नियमित निगरानी करने और फसल में बीमारी के शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर तत्काल उचित उपाय करने की अपील की है।
जिला कृषि रक्षा अधिकारी उमेश कुमार के अनुसार, वर्तमान मौसम में धान की फसल में जीवाणु झुलसा, झोंका रोग (ब्लास्ट) और शीथ ब्लाइट जैसी बीमारियां फसल को प्रभावित कर सकती हैं। समय रहते रोग की पहचान और नियंत्रण नहीं होने पर उत्पादन पर असर पड़ सकता है।
पत्तियों में पीलापन दिखे तो रहें सावधान
कृषि विभाग के मुताबिक जीवाणु झुलसा रोग में धान की पत्तियों के किनारों पर पीले या सफेद रंग के निशान दिखाई देने लगते हैं। धीरे-धीरे पत्तियां ऊपर से नीचे की ओर सूखने लगती हैं। रोग बढ़ने की स्थिति में पौधे की पत्तियां मुरझाकर नीचे की ओर झुक सकती हैं।
किसानों को सलाह दी गई है कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर खेत की स्थिति की जांच कराएं और कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार ही उपचार करें।
झोंका रोग में बनते हैं नाव के आकार के धब्बे
धान में झोंका रोग (ब्लास्ट) भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। इस रोग में पत्तियों पर भूरे रंग के धब्बे दिखाई देते हैं, जिनका आकार सामान्यतः नाव या आंख जैसा होता है। संक्रमण अधिक होने पर पत्तियां सूख सकती हैं और पौधे की वृद्धि प्रभावित हो सकती है।
कृषि विभाग ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और रोग की पुष्टि होने पर अनुशंसित फफूंदनाशी का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञों की सलाह के अनुसार करने को कहा है।
शीथ ब्लाइट से भी फसल को नुकसान
शीथ ब्लाइट धान में अधिक नमी और गर्म वातावरण में तेजी से फैल सकता है। इसके शुरुआती लक्षण पत्तियों और पर्णच्छद पर भूरे रंग के धब्बों के रूप में दिखाई देते हैं। संक्रमण बढ़ने पर धब्बे फैल सकते हैं और पौधे की उत्पादकता प्रभावित हो सकती है।
कृषि विभाग ने किसानों को खेत में अत्यधिक नमी की स्थिति से बचने और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का इस्तेमाल करने की सलाह दी है।
बिना पहचान के दवा का इस्तेमाल न करें
कृषि अधिकारियों ने किसानों से अपील की है कि फसल में किसी भी तरह के रोग के लक्षण दिखाई देने पर बिना जानकारी के कीटनाशक या फफूंदनाशी का प्रयोग न करें। पहले रोग की सही पहचान कराई जाए और इसके बाद कृषि विभाग या विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार ही निर्धारित मात्रा में दवा का इस्तेमाल किया जाए।
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