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मधुबन में सब्जी मंडी हटाने की चर्चा से किसान नाराज, 35 गांवों पर पड़ेगा असर

मधुबन तहसील के कटघराशंकर तिराहा पर सब्जी मंडी हटाने की चर्चा से स्थानीय किसानों में आक्रोश है। 30 से 35 गांवों के छोटे किसान यहां अपनी सब्जियां बेचते हैं और स्थाई मंडी की मांग कर रहे हैं।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 3 मिनट में पढ़ें
मधुबन में सब्जी मंडी हटाने की चर्चा से किसान नाराज, 35 गांवों पर पड़ेगा असर

मधुबन। मधुबन तहसील क्षेत्र के कटघराशंकर तिराहा स्थित सब्जी मंडी को हटाए जाने की चर्चा से स्थानीय किसानों में नाराजगी बढ़ गई है। किसानों का कहना है कि यह मंडी आसपास के करीब 30 से 35 गांवों के छोटे और सीमांत किसानों के लिए सब्जियां बेचने का प्रमुख स्थान है। मंडी हटने की स्थिति में किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए दूर जाना पड़ सकता है, जिससे परिवहन खर्च बढ़ने के साथ उनकी परेशानी भी बढ़ेगी।

स्थानीय किसानों के अनुसार, क्षेत्र में बड़ी संख्या में किसान सब्जियों की खेती पर निर्भर हैं। किसान सुबह अपनी ताजी सब्जियां लेकर कटघराशंकर तिराहा पहुंचते हैं और यहीं स्थानीय दुकानदारों तथा ग्राहकों को अपनी उपज बेचते हैं। इससे उन्हें आसपास ही बाजार मिल जाता है और सब्जियों को दूर ले जाने की जरूरत नहीं पड़ती।

मंडी हटाने की चर्चा से किसानों में आक्रोश

सब्जी मंडी को हटाने की चर्चा सामने आने के बाद किसानों में असंतोष है। उनका कहना है कि मंडी लंबे समय से स्थानीय कृषि कारोबार का महत्वपूर्ण केंद्र बनी हुई है। यदि इसे किसी दूसरे स्थान पर स्थानांतरित किया जाता है तो छोटे किसानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा।

किसानों का कहना है कि बड़ी मात्रा में सब्जियां उगाने वाले किसानों के पास परिवहन की पर्याप्त सुविधा नहीं होती। ऐसे में दूर स्थित बाजार तक उपज ले जाना उनके लिए महंगा और मुश्किल हो सकता है। इससे सब्जियों की लागत बढ़ने और किसानों को मिलने वाले लाभ में कमी आने की आशंका है।

स्थायी मंडी की मांग

स्थानीय किसान मंडी हटाने के बजाय कटघराशंकर तिराहा पर स्थायी सब्जी मंडी विकसित करने की मांग कर रहे हैं। किसानों का कहना है कि यदि प्रशासन की ओर से व्यवस्थित मंडी उपलब्ध करा दी जाए तो किसानों के साथ-साथ व्यापारियों और स्थानीय उपभोक्ताओं को भी सुविधा मिलेगी।

किसानों ने प्रशासन से मामले में स्पष्ट स्थिति सामने रखने और उनकी समस्याओं को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था करने की मांग की है। उनका कहना है कि किसी भी निर्णय से पहले क्षेत्र के किसानों और सब्जी व्यापारियों से बातचीत की जानी चाहिए।

30-35 गांवों के किसानों की आजीविका जुड़ी

किसानों के मुताबिक, कटघराशंकर तिराहा की मंडी से आसपास के 30 से 35 गांवों के छोटे किसान जुड़े हुए हैं। इसलिए मंडी से संबंधित किसी भी बदलाव का असर केवल एक स्थान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि बड़ी संख्या में किसानों की रोजमर्रा की बिक्री और आय पर पड़ सकता है।

किसानों ने चेतावनी दी है कि उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ तो वे प्रशासन के सामने अपनी मांग को मजबूती से उठाएंगे। फिलहाल मंडी को लेकर किसानों और स्थानीय लोगों के बीच चर्चा जारी है और सभी की नजर प्रशासन के अगले कदम पर है।

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