मुख्य सामग्री पर जाएँ
खबर, आँकड़े और विश्लेषण
Advertisement

बीएचयू में 27 से 29 अक्तूबर तक विशेष कार्यशाला का आयोजन

बीएचयू में 27 से 29 अक्तूबर तक विशेष कार्यशाला होगी, जिसमें देशभर के भाषाविद् गांव-समाज की कहावतों के भावों पर चर्चा करेंगे।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 3 मिनट में पढ़ें
बीएचयू में 27 से 29 अक्तूबर तक विशेष कार्यशाला का आयोजन

वाराणसी। काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) में 27 से 29 अक्टूबर तक तीन दिवसीय विशेष कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा। इस कार्यशाला में देशभर के भाषाविद् और भाषा-साहित्य से जुड़े विशेषज्ञ भाग लेंगे। इसमें गांव-समाज में प्रचलित कहावतों, उनके भावार्थ, सामाजिक संदर्भ और लोकजीवन में उनकी भूमिका पर चर्चा की जाएगी। कार्यशाला का उद्देश्य लोकभाषाओं में पीढ़ियों से संरक्षित ज्ञान, अनुभव और सांस्कृतिक परंपराओं को समझना तथा उनके महत्व को सामने लाना है।

लोकजीवन की कहावतों पर होगा विमर्श

गांवों में प्रचलित कहावतें केवल बोलचाल का हिस्सा नहीं हैं, बल्कि वे समाज के अनुभवों, जीवन मूल्यों और व्यवहारिक ज्ञान को भी व्यक्त करती हैं। कम शब्दों में गहरी बात कहने वाली ये कहावतें ग्रामीण जीवन की परिस्थितियों, सामाजिक संबंधों और मान्यताओं को समझने का माध्यम रही हैं।

कार्यशाला में इन कहावतों के भावों और अर्थों पर चर्चा के दौरान यह समझने का प्रयास किया जाएगा कि अलग-अलग क्षेत्रों में प्रचलित कहावतें वहां की भाषा, संस्कृति और सामाजिक परिस्थितियों को किस प्रकार प्रतिबिंबित करती हैं। भाषाविदों के लिए यह विषय लोकभाषाओं की संरचना और उनके सामाजिक उपयोग को समझने का महत्वपूर्ण अवसर हो सकता है।

भाषा और संस्कृति के संबंधों पर भी रहेगा जोर

लोकभाषाओं में प्रचलित कहावतें लंबे समय से मौखिक परंपरा के जरिए एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक पहुंचती रही हैं। इनके माध्यम से लोग अपने अनुभव, जीवन की सीख और सामाजिक व्यवहार से जुड़ी बातें अगली पीढ़ी को बताते रहे हैं।

समय के साथ भाषा और समाज में बदलाव आने के कारण कई स्थानीय कहावतों का इस्तेमाल कम होता जा रहा है। ऐसे में इनका संकलन, अर्थ विश्लेषण और दस्तावेजीकरण करना महत्वपूर्ण माना जाता है। कार्यशाला में होने वाली चर्चा से लोकभाषाओं की विविधता और उनके सांस्कृतिक महत्व को समझने के नए दृष्टिकोण सामने आ सकते हैं।

शोधार्थियों और भाषा के विद्यार्थियों के लिए उपयोगी आयोजन

बीएचयू में आयोजित होने वाली यह कार्यशाला भाषा, साहित्य, लोकसंस्कृति और समाज के संबंधों में रुचि रखने वाले लोगों के लिए महत्वपूर्ण होगी। भाषाविदों के अनुभव और विचारों के आदान-प्रदान से लोकभाषाओं पर शोध करने वाले विद्यार्थियों तथा शोधार्थियों को भी लाभ मिलने की संभावना है।

गांव-समाज की कहावतों का अध्ययन केवल भाषाई विश्लेषण तक सीमित नहीं है। इनके जरिए सामाजिक सोच, परंपराओं और सामूहिक अनुभवों को भी समझा जा सकता है। यही कारण है कि लोककथाओं, कहावतों और मौखिक परंपराओं को भारतीय सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता है।

लोकपरंपराओं के संरक्षण की दिशा में पहल

काशी हिंदू विश्वविद्यालय में 27 से 29 अक्टूबर तक होने वाली इस विशेष कार्यशाला के माध्यम से गांव-समाज में प्रचलित कहावतों के भावों और सामाजिक अर्थों पर विमर्श किया जाएगा। देशभर के भाषाविदों की भागीदारी से विभिन्न भाषाई क्षेत्रों के अनुभवों को साझा करने का अवसर मिलेगा।

यह कार्यशाला लोकभाषाओं में छिपे सामाजिक ज्ञान और सांस्कृतिक अनुभवों को समझने की दिशा में महत्वपूर्ण मंच बन सकती है। हालांकि, कार्यशाला के आयोजक विभाग, वक्ताओं के नाम, सत्रों की समय-सारिणी और पंजीकरण संबंधी विस्तृत जानकारी उपलब्ध होने पर कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा स्पष्ट हो सकेगी।

खबर काम की लगी? अपने लोगों तक पहुँचाएँ।

कोई भी पंक्ति चुनकर उसे उद्धरण के रूप में भी शेयर कर सकते हैं।

WhatsApp
और पढ़ें

संबंधित खबरें

धनतेरस पर वाराणसी और बलिया में बाजारों में बढ़ी रौनक व्यापार NewsDeskसत्यापित पत्रकार
वाराणसी

धनतेरस पर वाराणसी और बलिया में बाजारों में बढ़ी रौनक

आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर में अर्नब तूफान से धान की फसल को नुकसान कृषि और मंडी NewsDeskसत्यापित पत्रकार
आज़मगढ़

आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर में अर्नब तूफान से धान की फसल को नुकसान

वाराणसी से दिल्ली के बीच 31 अक्टूबर को शुरू होगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन प्रशासन और योजनाएँ NewsDeskसत्यापित पत्रकार
वाराणसी

वाराणसी से दिल्ली के बीच 31 अक्टूबर को शुरू होगी वंदे भारत स्लीपर ट्रेन

योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग से प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पूछे 7 सवाल राजनीति NewsDeskसत्यापित पत्रकार
वाराणसी

योगेंद्र यादव ने चुनाव आयोग से प्रेस कॉन्फ़्रेंस में पूछे 7 सवाल