वाराणसी में 512 दुर्गा पूजा पंडाल, 725 प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी
वाराणसी में शारदीय नवरात्र के लिए दुर्गा पूजा की तैयारियां अंतिम चरण में हैं। इस वर्ष 512 पंडालों में 725 प्रतिमाएं स्थापित की जाएंगी, लेकिन खराब सड़कों और गंदे कुंडों के कारण श्रद्धालुओं को कठिनाइयों का सामना करना पड़ सकता है।
वाराणसी। शारदीय नवरात्र और दुर्गा पूजा को लेकर धर्मनगरी में तैयारियां अंतिम दौर में पहुंच गई हैं। शहर के विभिन्न इलाकों में इस बार 512 दुर्गा पूजा पंडालों में 725 प्रतिमाओं की स्थापना की तैयारी है। पूजा समितियों की ओर से पंडाल निर्माण, सजावट, विद्युत व्यवस्था और प्रतिमाओं को अंतिम रूप देने का काम तेजी से चल रहा है। नवरात्र शुरू होने के साथ ही इन पंडालों में श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ने की उम्मीद है।
कई इलाकों में पूजा समितियों ने आकर्षक पंडाल तैयार करने के लिए अलग-अलग थीम पर काम शुरू किया है। कहीं धार्मिक स्वरूप तो कहीं पारंपरिक बंगाली शैली में पंडालों को सजाया जा रहा है। शाम होते ही रंग-बिरंगी रोशनी से पंडालों और आसपास के इलाके को सजाने की तैयारी है। समितियों के पदाधिकारी व्यवस्था को अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं।
खराब सड़कें बनीं चिंता का कारण
दुर्गा पूजा के दौरान सबसे बड़ी चुनौती कई इलाकों की खराब सड़कें बनी हुई हैं। पंडालों तक पहुंचने वाले मार्गों पर जगह-जगह गड्ढे हैं। कई स्थानों पर सड़क की सतह क्षतिग्रस्त होने के साथ ही बारिश के कारण कीचड़ और जलभराव की स्थिति भी देखने को मिल रही है। ऐसे में दर्शन के लिए निकलने वाले बुजुर्गों, महिलाओं और बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ सकता है।
पूजा समितियों और स्थानीय नागरिकों का कहना है कि नवरात्र से पहले यदि सड़कों की मरम्मत नहीं कराई गई तो भीड़ बढ़ने पर स्थिति और मुश्किल हो सकती है। पंडालों के आसपास यातायात व्यवस्था भी चुनौतीपूर्ण रहने की संभावना है।
गंदे कुंडों से विसर्जन व्यवस्था पर सवाल
दुर्गा पूजा के बाद प्रतिमाओं के विसर्जन की तैयारियों को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। शहर के कुछ कुंडों और जलाशयों में अभी साफ-सफाई की स्थिति संतोषजनक नहीं है। कई जगह गंदगी, जलकुंभी और कचरा जमा होने की शिकायत है। पूजा समितियों का कहना है कि समय रहते कुंडों की सफाई नहीं कराई गई तो प्रतिमा विसर्जन के दौरान परेशानी बढ़ सकती है।
सफाई और प्रकाश व्यवस्था की मांग
पंडालों के आसपास साफ-सफाई के साथ पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था की भी जरूरत बताई जा रही है। देर शाम और रात में बड़ी संख्या में श्रद्धालु पंडालों में दर्शन के लिए पहुंचेंगे। ऐसे में अंधेरे वाले स्थानों पर अतिरिक्त स्ट्रीट लाइट और अस्थायी प्रकाश व्यवस्था जरूरी होगी। समितियों ने नगर निगम और संबंधित विभागों से पंडालों के आसपास नियमित सफाई कराने की मांग की है।
सुरक्षा और यातायात पर भी रहेगा जोर
512 पंडालों में 725 प्रतिमाओं की स्थापना होने से शहर में श्रद्धालुओं की आवाजाही काफी बढ़ेगी। प्रमुख पंडालों और भीड़ वाले इलाकों में यातायात व्यवस्था बनाए रखना प्रशासन के लिए चुनौती होगा। पूजा समितियों की ओर से भीड़ को नियंत्रित करने और दर्शन व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए स्वयंसेवकों की तैनाती की तैयारी की जा रही है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि दुर्गा पूजा शहर के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। ऐसे में प्रशासन को नवरात्र शुरू होने से पहले खराब सड़कों की मरम्मत, कुंडों की सफाई, जलभराव की समस्या दूर करने, पर्याप्त रोशनी और यातायात व्यवस्था पर विशेष ध्यान देना चाहिए। समय रहते व्यवस्थाएं दुरुस्त होने पर श्रद्धालुओं को दुर्गा पूजा के दौरान बेहतर सुविधा मिल सकेगी।
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