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आजमगढ़ में ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती दी, सपा के गढ़ ढहने का दावा

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव पर हमला करते हुए कहा कि आजमगढ़ में सपा का गढ़ ढहने वाला है। उन्होंने 29 नवंबर को आजमगढ़ में होने वाली सुभासपा की महारैली का जिक्र करते हुए सपा के PDA नारे को ढकोसला बताया।

N NewsDeskसत्यापित पत्रकार एडिटर 5 मिनट में पढ़ें
आजमगढ़ में ओपी राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती दी, सपा के गढ़ ढहने का दावा

आजमगढ़/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले राजनीतिक सरगर्मियां तेज होती जा रही हैं। इसी बीच उत्तर प्रदेश सरकार में कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर ने समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा हमला बोला है। राजभर ने दावा किया कि आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी का राजनीतिक गढ़ अब ढहने वाला है। उन्होंने अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक) नारे को ढकोसला बताते हुए 29 नवंबर को होने वाली सुभासपा की सामाजिक समरसता महारैली के जरिए अपनी ताकत दिखाने की बात कही।

अखिलेश यादव को सीधे दी चुनौती

ओम प्रकाश राजभर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपने बयान के जरिए अखिलेश यादव को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव के कथित राजनीतिक गढ़ एक के बाद एक कमजोर पड़ रहे हैं। राजभर ने कन्नौज का जिक्र करते हुए दावा किया कि अब आजमगढ़ में भी समाजवादी पार्टी को राजनीतिक चुनौती का सामना करना पड़ेगा।

सुभासपा प्रमुख ने कहा कि अखिलेश यादव आजमगढ़ को अपनी पार्टी का मजबूत गढ़ मानते हैं, लेकिन आने वाले समय में यहां की राजनीतिक तस्वीर बदल सकती है। उन्होंने दावा किया कि क्षेत्र में गैर-यादव पिछड़े वर्गों और बहुजन समाज की एकजुटता समाजवादी पार्टी के लिए चुनौती बनेगी।

राजभर के इस बयान को आगामी विधानसभा चुनाव से पहले पूर्वांचल में सुभासपा की राजनीतिक जमीन मजबूत करने की कोशिश के तौर पर देखा जा रहा है। हालांकि, सपा के गढ़ के कमजोर होने संबंधी उनके दावे राजनीतिक बयान हैं और इनके प्रभाव का आकलन आगामी चुनावों में ही हो सकेगा।

पीडीए के नारे पर उठाए सवाल

ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव की पीडीए राजनीति पर भी सवाल खड़े किए। उन्होंने आरोप लगाया कि समाजवादी पार्टी पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक समुदायों को चुनाव के समय वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल करती है।

राजभर ने विशेष रूप से राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल, पाल और अन्य गैर-यादव पिछड़ी जातियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इन समुदायों को अपनी राजनीतिक ताकत पहचाननी चाहिए। उनके मुताबिक, इन वर्गों को केवल चुनाव के दौरान याद करने की राजनीति अब नहीं चलने वाली।

उन्होंने दावा किया कि पूर्वांचल में दलितों, पिछड़ों और खासकर गैर-यादव पिछड़े समाज को एकजुट करके नई राजनीतिक ताकत खड़ी की जाएगी। राजभर का कहना है कि पीडीए के नाम पर किए जा रहे दावों की वास्तविकता आजमगढ़ की महारैली में सामने आएगी।

29 नवंबर को आईटीआई मैदान में होगी सामाजिक समरसता महारैली

सुभासपा प्रमुख ने 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में विशाल सामाजिक समरसता महारैली आयोजित करने की घोषणा की है। पार्टी इस कार्यक्रम को पूर्वांचल में अपनी राजनीतिक ताकत प्रदर्शित करने के बड़े अवसर के रूप में पेश कर रही है।

राजभर ने दावा किया कि महारैली में गैर-यादव पिछड़े वर्गों और बहुजन समाज की भागीदारी के जरिए उनकी एकजुटता का संदेश दिया जाएगा। उन्होंने अखिलेश यादव को चुनौती देते हुए कहा कि रैली की वीडियो रिकॉर्डिंग देखकर आजमगढ़ में सुभासपा की ताकत का अंदाजा लगाया जा सकेगा।

इस कार्यक्रम का प्रमुख उद्देश्य विभिन्न पिछड़ी जातियों और दलित समुदायों के बीच राजनीतिक एकजुटता का संदेश देना बताया जा रहा है। इसके जरिए सुभासपा आजमगढ़ में समाजवादी पार्टी के पारंपरिक प्रभाव को चुनौती देने की रणनीति पर काम करती दिखाई दे रही है।

आजमगढ़ में सपा की मजबूत राजनीतिक पृष्ठभूमि

आजमगढ़ लंबे समय से समाजवादी पार्टी के प्रमुख राजनीतिक क्षेत्रों में गिना जाता है। जिले की राजनीति में यादव और मुस्लिम मतदाताओं के साथ अन्य पिछड़े वर्गों तथा दलित समुदायों की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है। ऐसे में अलग-अलग सामाजिक समूहों को अपने पक्ष में लामबंद करना राजनीतिक दलों के लिए अहम है।

सुभासपा प्रमुख का जोर गैर-यादव पिछड़े वर्गों को एकजुट करने पर है। उनकी रणनीति के तहत राजभर, निषाद, चौहान, प्रजापति, पटेल और पाल जैसे समुदायों को राजनीतिक रूप से सक्रिय करने की कोशिश की जा रही है। दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी पीडीए के माध्यम से पिछड़े, दलित और अल्पसंख्यक वर्गों को एक साझा राजनीतिक मंच पर लाने की बात करती है।

इसी कारण आजमगढ़ में होने वाली महारैली को केवल एक पार्टी के कार्यक्रम के बजाय आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सामाजिक समीकरणों को प्रभावित करने की कोशिश के रूप में भी देखा जा रहा है।

2027 के चुनाव से पहले बढ़ेगी सियासी टक्कर

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को ध्यान में रखते हुए राजनीतिक दलों ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। सुभासपा की सामाजिक समरसता महारैली के जरिए ओम प्रकाश राजभर आजमगढ़ में अपनी पार्टी का प्रभाव बढ़ाने और गैर-यादव पिछड़े वर्गों के बीच समर्थन मजबूत करने का प्रयास कर रहे हैं।

राजभर के बयान से साफ है कि उनकी पार्टी आने वाले चुनाव में समाजवादी पार्टी के प्रभाव वाले क्षेत्रों में भी अपनी राजनीतिक मौजूदगी दर्ज कराने की तैयारी में है। वहीं, पीडीए के मुद्दे पर सपा और सुभासपा के बीच जुबानी जंग तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

अब सबकी नजरें 29 नवंबर को आजमगढ़ के आईटीआई मैदान में होने वाली महारैली पर रहेंगी। रैली में कितनी भीड़ जुटती है, विभिन्न सामाजिक वर्गों की भागीदारी कैसी रहती है और इसका स्थानीय राजनीति पर कितना असर पड़ता है, यह देखना महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल ओम प्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव को चुनौती देकर उत्तर प्रदेश की राजनीति में 2027 के चुनाव से पहले एक नई बहस छेड़ दी है।

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